Khwabgaah.....
Friday, May 27, 2016
"ये तो है कि , दिनं भर के दीदों के बाद
देर रात अंधेरे में इन चश्मों को उतारो तो एक् खुशफेहेमी सी होती है ,
तुम यहीं हो ...उस मोड़ से बस चले आ रहे हो....चले ही आ रहे हो ...."
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